इस देश में माचिस के डब्बे से भी सस्ता है पेट्रोल, जानिए किन देशों में सबसे सस्ता और महंगा है ईंधन

Drive Spark via Dailyhunt

दुनिया में कुछ देश क्रूड आयल यानी कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं जबकि कई ऐसे देश हैं जो पूरी तरह से तेल आयात करते हैं। ऐसे कई कारक हैं जो दुनिया भर में ईंधन की दर को प्रभावित करते हैं।

भारत दशकों से एक प्रमुख तेल आयातक देश रहा है और मांग को पूरा करने के लिए दूसरे देशों से आयात पर निर्भर है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने दरों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और इससे कोई जल्द राहत भी दिखाई नहीं दे रही है।

लेकिन भारत उन देशों में कभी नहीं रहा है और ही अब भी है, जहां वाहन ईंधन सबसे महंगा है। क्रय शक्ति जैसे कारकों को अलग रखते हुए, दुनिया भर के कई अन्य देशों में ईंधन की कीमत भारत के मुकाबले कहीं अधिक है।

आइये जानते हैं दुनिया के किन देशों में ईंधन भारत से महंगा और सस्ता है।

दुनिया में सबसे महंगा ईंधन हांगकांग में बिक रहा है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.56 डॉलर, तकरीबन 192 रुपये है। वहीं यूरोपीय देश नीदरलैंड में पेट्रोल 2.18 डॉलर प्रति लीटर की दर से बिक रहा है जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से 163 रुपये होता है।

मध्य अफ्रीकी गणराज्य में पेट्रोल की कीमत 2.14 डॉलर ( करीब 160 रुपये) प्रति लीटर है। नॉर्वे, इजराइल, डेनमार्क, मोनाको, ग्रीस, फिनलैंड और आइसलैंड में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दुनिया भर में सबसे अधिक हैं।

तेल निर्यातक देश वेनेजुएला में पेट्रोल सबसे कम कीमत पर बिक रहा है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत महज 0.02 डॉलर ( 1.50 रुपये) है जो कि एक माचिस के डब्बे से भी सस्ता है।

सबसे किफायती ईंधन की सूची में अगला स्थान ईरान का है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत महज 0.06 डॉलर ( 4.51 रुपये) है। संघर्ष के कारण सीरिया में तेल की कीमतें काफी गिर गई हैं। यहां पेट्रोल 0.23 डॉलर ( 17 रुपये) प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है।

अंगोला, अल्जीरिया, कुवैत, नाइजीरिया, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान और इथियोपिया जैसे देशों में ईंधन की कीमतें दुनिया में सबसे सस्ती हैं। इन देशों में पेट्रोल की कीमत 0.50 डॉलर यानी 35 रुपये से भी कम है।

दुनिया भर के अधिकांश देशों की तरह, भारत में पेट्रोल की दरें विभिन्न प्रकार के करों और शुल्कों के अधीन हैं। यह केंद्र और राज्य सरकारों के लिए राजस्व सृजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

और क्योंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों का आयात करता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल की कीमत के साथ- साथ रुपये और डॉलर के प्रदर्शन का भी असर पड़ता है।

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