कार में सुनते हैं तेज आवाज में म्यूजिक तो हो जाएं सावधान, दिल्ली पुलिस ने जारी किया नोटिस

Drive Spark via Dailyhunt

पिछले दो सप्ताह में ही दिल्ली पुलिस ने 4,000 से ज्यादा वाहनों के चालान काटे हैं। जिसमें 371 चालान गाड़ी में तेज म्यूजिक बजाने के लिए काटे गए हैं।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली यातायात पुलिस ने पिछले 15 दिनों में मॉडिफाइड साइलेंसर के लिए 3,887 चालान जारी किए हैं, जबकि 1,177 चालान प्रेशर हॉर्न के उपयोग के कारण जारी किए गए हैं।

इसके अलावा साइलेंट जोन में हॉर्न बजाने पर 65 चालान काटे गए हैं।

दिल्ली में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। वायु प्रदूषण के साथ- साथ अब ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ भी एक्शन लिए जा रहे हैं। पुलिस ने ऐसा करने वालों से निपटने के लिए सख्त नियम बनाए हैं।

दिल्ली पुलिस ने त्योहारों के दौरान गाड़ी में तेज आवाज में गाना सुनने वालों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार किया है।

बता दें कि ड्राइव करते समय कार के अंदर तेज आवाज में म्यूजिक सुनना खतरनाक साबित हो सकता है। कार ड्राइव करते समय तेज आवाज में गाना सुनने से सड़क से ध्यान भटक सकता है। म्यूजिक बजने के कारण दूसरे गाड़ियों के हॉर्न की आवाज भी सुनाई नहीं देती है।

ऐसे में इस लापरवाही से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी घटनाओं का शिकार ज्यादातर युवा होते हैं जो मौज मस्ती करने के लिए अपनी गाड़ी में लाउड म्यूजिक बजाते हैं।

दिल्ली में पीयूसी हुआ अनिवार्यदिल्ली में सर्दियों के पहले प्रदूषण से निपटने की कोशिश शुरू हो चुकी है। दिल्ली सरकार ने राज्य में वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट ( Pollution Under Control Certificate) को अनिवार्य कर दिया है।

अब बगैर वैद्य पीयूसी के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। यही नहीं, अगर वाहन का वैद्य पीयूसी नहीं करवाया है तो 6 महीने की जेल या 3 महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।

दिल्ली में परिवहन विभाग द्वारा 900 से अधिक अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र हैं, जो शहर भर में फैले पेट्रोल पंपों और कार्यशालाओं में स्थापित हैं। दिल्ली सरकार ने सभी मोटर वाहन चालकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने वाहनों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के साथ चलाएं।

बता दें कि कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे विभिन्न प्रदूषकों के लिए वाहनों का उनके उत्सर्जन मानकों के लिए समय- समय पर परीक्षण किया जाता है जिसके बाद उन्हें पीयूसी प्रमाणपत्र दिया जाता है।

पीयूसी सर्टिफिकेट केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट, 1989 के तहत जारी किया जाता है। पीयूसी की जांच के लिए पेट्रोल पंप पर ऑटोमेटेड पीयूसी सेंटर स्थापित किये गए हैं, जहां जांच के बाद तुरंत सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

सीमा से ज्यादा उत्सर्जन पाए जाने पर रिजेक्शन स्लिप जारी किया जाता है।

इसके अलावा दिल्ली में वाहन चालकों से रेड ट्रैफिक लाइट में इंजन बंद रखने की अपील भी की जा रही है।

18 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान में 2,500 से ज्यादा नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है जो शहर के 100 ट्रैफिक जंक्शनों पर सुबह 8 से दोपहर 2 बजे और दोपहर 2 से 8 बजे तक दो पालियों में काम करेंगे।

स्वयंसेवक शहर में प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ाएंगे और ट्रैफिक लाइट के लाल होने पर मोटर चालकों से स्वेच्छा से इंजन बंद करने का आग्रह करेंगे।

पूरी कहानी देखें