चिप प्लांट लगाने पर सरकार देगी 50 प्रतिशत तक की छूट, जानें क्या है स्कीम

Drive Spark via Dailyhunt

चिप प्लांट लगाने पर सरकार मदद के लिए सामने आई है और 28 नैनोमीटर तक की चिप निर्माण की कंपनी लगाने पर सरकार 50 प्रतिशत तक की छूट देने वाली है। देश में सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए हाल ही में सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी।

इन चिप का उपयोग प्रोसेसिंग यूनिट, ग्राफिक्स प्रोसेसर, कनेक्टेड तकनीक ऑटोमोटिव सेक्टर द्वरा भी उपयोग में लाया जाता है।

पिछले कुछ सालों में ऑटो इंडस्ट्री में चिप का उपयोग बढ़ा है क्योकि अब नए कार आधुनिक फीचर्स उपकरण के साथ आती है, हालांकि कोविड की वजह से इनका उत्पादन प्रभावित हुआ है और मांग के अनुरूप पूर्ति नहीं हो पा रही है।

इस कमी ने ऑटो सेक्टर के साथ साथ सभी सेक्टर को प्रभावित किया है। हालांकि यह छूट पाने के लिए सरकार ने कई शर्तें रखी है, इसके तहत कंपनी को 20,000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।

इसके साथ ही कंपनी का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाईन निर्माण में ग्रुप की कमाई, आखिर तीन में से एक साल में, 7500 करोड़ रुपये की कमाई होनी चाहिए।

इस स्कीम को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन एजेंसी के द्वारा प्रभाव में लाया जाएगा। यह स्कीम छह सालों के लिए है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स आईटी मंत्री के अप्रूवल के बाद इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।

हाल ही में टाटा ग्रुप ने देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण में रूचि दिखाई थी, कंपनी अगले तीन साल में सेमीकंडक्टर का निर्माण शुरू कर सकती है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में सेमीकंडक्टर चिप के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 76 हजार करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना ( पीएलआई स्कीम) की घोषणा की है।

बताया जाता है कि अगले 2 - 3 सालों में देश में घरेलू आवश्यकता के लिए सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। चिप निर्माण उद्योग के क्षेत्र में संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए, सरकार अगले साल जनवरी से पीएलआई स्कीम के तहत आवेदन लेना शुरू करेगी।

केंद्रीय सुचना एवं प्रोद्यौगिकी मंत्री वैष्णव जैन ने कहा कि अगले 2 - 3 वर्षों में लगभग 10 - 12 कंपनियां सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान लगभग 50 - 60 डिजाइनिंग कंपनियां भी सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़ जाएंगी।

बता दें कि देश में चिप निर्माण के लिए पीएलआई योजना ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर के ऑटो उद्योग को पुर्जों की कमी के कारण उत्पादन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस कदम से देश के ऑटो सेक्टर को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। महामारी के बाद चिप की मांग आसमान छू गई है क्योंकि उपभोक्ता तकनीकी उत्पाद की मांग, जो चिप का भी उपयोग करती है, लॉकडाउन के दौरान तेजी से बढ़ी है।

चिप निर्माताओं ने भी अपनी उत्पादन क्षमता को उसी के अनुसार स्थानांतरित कर दिया।

लेकिन बाद में जब ऑटो उद्योग ने लॉकडाउन के बाद परिचालन फिर से शुरू किया, तो माइक्रोचिप्स की मांग में काफी वृद्धि हुई, और एक बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ क्योंकि चिप निर्माता मांग को पूरा करने में असमर्थ हो गए।

देश में चिप निर्माण से इस सेक्टर में भी भारत आत्मनिर्भर हो जाएगा और इस वजह से सरकार लगातार इसे बढ़ावा दे रही है। इस क्षेत्र में टाटा ग्रुप वेंदाता ग्रुप ने रूचि दिखाई है, अब देखना होगा कि कौन सी कंपनियां इसकी शुरुआत करती है।

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