Bahraich : नेपाली गैंडो को पसंद रहे कतर्नियाघाट सेंचुरी के ग्रासलैंड, पर्यटकों के लिए बने आकर्षण का केंद्र
कतर्निया वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश, भारत में ऊपरी गंगा के मैदान में एक संरक्षित क्षेत्र यह है।
बहराइच जिले के तेराई में 400 .6 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है।
ये गैंडे नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से खाताकारी डोर के रास्ते कतर्नियाघाट पहुंचे हैं। अभी तक गैंडों का प्रवास स्थल गेरुआ पार का जंगल था।
गैंडे नेपाल सीमा से सटे कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र को बाघ, तेंदुओं तथा हाथियों के लिए जाना जाता है।
लेकिन, यहां कुछ दिनों से गैंडों का मूवमेंट गेरुआ पार के जंगल में दिख रहा था। लेकिन गैंडे इस पार आने से परहेज करते थे।
जिससे अधिकांश पर्यटकों को निराशा हाथ लगती थी।
जंगल नेपाली गैंडों को कतर्नियाघाट सेंक्चुरी वर्ष 1997 से रास रहा है।
खाता कारीडोर के रास्ते गैंडों का झुंड अक्सर कतर्नियाघाट आता था और फिर वापस लौट जाता था लेकिन वर्ष 2002 के बाद से गैंडों का ठहराव भी होने लगा है।
इस समय तीन वयस्क दो शिशु गैंडे गेरुआ पार के कतर्निया जंगल में प्रवास कर रहे हैं।
कतर्नियाघाट रेंज के ट्रांसगेरुआ इलाके में गैंडे के प्रवास की सूचना मिली है।
उसकी सुरक्षा के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है। वन्य जीव किसी एक देश के नहीं होते।
वह प्रकृति की अनुकूलता के अनुरूप विचरण करते हैं। कतर्नियाघाट में ग्रासलैंड की कमी नहीं है। गैंडों के अनुकूल वातावरण है।
कतर्नियाघाट कातेरीनाघाट वन भारत में दुधवा और किशनपुर के बाघ के निवास और नेपाल में बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान के बीच सामरिक संपर्क प्रदान करता है।
इसकी नाजुक तेराई पारिस्थितिकी तंत्र में सैल और सागौन के जंगलों, प्रचुर घास के मैदानों, कई दलदलों और नलिकाओं का मोज़ेक शामिल है।
By Shivam Gaur Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt