'तुम्हे होटल नहीं, सीधा घर भेजूंगा', सचिन ने बताया कप्तान के तौर पर युवा साथी को कैसे समझाना पड़ा
सचिन तेंदुलकर एक ऐसे खिलाड़ी थे जो 90 के दशक में डॉन ब्रैडमैन के बाद सबसे महान बल्लेबाज के तौर पर आंके जाते थे।
कई लोगों का तो कहना था शायद इतना प्रेशर ब्रैडमैन भी ना झेल पाते इसलिए सचिन उनसे भी महान हो सकता था। वह दौर ही ऐसा था।
सचिन आज भले ही इस पर बहस हो सकती हैं कि सचिन महानता की लिस्ट में कितनों से आगे हैं और कितनों से पीछे लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कि वे महानतम बल्लेबाजों में हमेशा एक रहेंगे।
उनके ही नाम पर 100 इंटरनेशनल शतक हैं। बस सचिन एक बेहतर कप्तान साबित नहीं हो सके।
अगर ऐसा होता तो वे एक नाम बन जाते जिसका बहुत गहरा असर भारतीय जनमानस पर दिखाई देता।
सचिन की महानता अपनी जगह बरकरार रहनी है।
तेंदुलकर ने याद किया कि कैसे उन्हें ऑस्ट्रेलियाई दौरे में एक अभ्यास मैच के दौरान अपनी ही टीम के एक जूनियर खिलाड़ी को नसीहत की घुट्टी पिलानी पड़ी।
ये युवा उस मैच के दौरान फील्डिंग करते हुए बहक रहा था। तब सचिन ने उसे एक कड़ी चेतावनी।
'मैं तुम्हें घर वापस भेज दूंगा' इंफोसिस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में तेंदुलकर ने खुलासा किया, " मैं टीम का कप्तान था और हम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं।
जूनियर खिलाड़ियों में से एक था। यह उसका पहला दौरा था - वह बहक गया था, वह भीड़ के साथ मजे कर रहा था, और जहां सिंगल देना था, उसने दो रन दिए।
तेंदुलकर ने 25 टेस्ट में भारत की कप्तानी की लेकिन केवल चार जीते, नौ में हार हुई जबकि 12 ड्रॉ रहे।
वनडे ( 73 मैचों) में तेंदुलकर की कप्तानी में भारत 31 प्रतिशत मैच ही जीत पाया था।
By Antriksh Singh Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt