चांद पर बिजली पहुंचाने की तैयारी! जानें लंबी रातों में कैसे छंटेगा अंधेरा ?
नासा 5 दशक के बाद एक बार फिर से अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की तैयारी कर चुका है। लेकिन, नया मिशन पिछले मिशन की तुलना में काफी खास है।
इस बार इंसान सिर्फ इंसानी झंडा गाड़ने के लिए चांद पर नहीं जा रहा है। इस बार का आर्टेमिस मिशन लंबे समय के लिए है।
वहां पर लंबे वक्त तक ठहरने लायक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना है।
अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा पचास साल बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने जा रहा है।
इस बार नासा का मकसद सिर्फ इंसान को चंद्रमा की सतह पर उतारना भर नहीं है, बल्कि आर्टेमिस मिशन का उद्देश्य वहां लंबे वक्त तक ठहरने लायक आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
आर्टेमिस मिशन के अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की जिस छोर पर उतरेंगे, वहां उन्हें लूनर नाइट का सामना करना होगा।
यानि जहां 14 दिनों तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचेगी, जिससे बिजली के लिए सौर ऊर्जा वाला स्रोत सीमित हो जाएगा।
नासा ग्लेन अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन के लिए पावर सिस्टम रिसर्च पर काम करती है।
यहां के इंजीनियर और तकनीशियन बिजली के उत्पादन, ऊर्जा संरक्षण और उसे स्टोर करके रखने पर रिसर्च करते हैं।
न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी उपलब्ध सूर्य के प्रकाश की परवाह किए बिना किसी भी वातावरण या स्थान में मजबूत, विश्वसनीय ऊर्जा दे सकती है।
आर्टेमिस मिशन की सफलता 2030 के दशक में मंगल पर इंसान को उतारने के लक्ष्य से भी जुड़ा हुआ है।
इन सबके लिए न्यूक्लियर प्रप्लशन और न्यूक्लियर रिएक्टर बेहतर विकल्प हो सकता है।
By Anjan Kumar Chaudhary Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt