अब्‍दुल रज्‍जाक : पिता की कैंसर से मौत के बाद जैविक खेती में बने रोल मॉडल, सालाना कमाई एक करोड़ रुपए
ऐसा कर दिखाया राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले एक किसान अब्दुल रज्जाक ने।
रासायनिक उर्वरक की मदद से उगाए गए खीरा ककड़ी खाने के शौकीन बुजुर्ग पिता की कैंसर से मृत्यु हो जाने के बाद अब्दुल जैविक खेती की ऐसी अलख जगाई कि वह आज लोगों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।
अब्‍दुल रज्‍जाक भीलवाड़ा जिले के बीगोद कस्‍बे के रहने वाले ये हैं अब्‍दुल रज्‍जाक। राजस्‍थान के भीलवाड़ा जिले के बीगोद कस्‍बे के रहने वाले हैं।
पिता की मौत के बाद इनकी जिंदगी की दिशा बदल गई। ये रासायनिक उर्वरक वाली खेती छोड़ जैविक खेती करने लगे।
इसी मामले में अब केवल रोल मॉडल बन गए बल्कि सालाना एक करोड़ रुपए से ज्‍यादा की कमाई भी कर रहे हैं।
साल 2006 में दसवीं कक्षा उत् तीर्ण करने के बाद अब् दुल रज् जाक ने खेती करने की सोची थी। पिता हारून आजाद को खीरा, ककड़ी खाने का बड़ा शौक था।
यह खीरा ककड़ी पॉलीहाउस की रसायनिक खाद और उर्वरक से पैदा होती थी। ऐसे में पिता को कैंसर ने जकड़ लिया। साल 2012 में अपने पिता का इंतकाल हो गया।
रज् जाक ने 10 एकड़ जमीन में से 2 एकड़ में अमरूद और संतरे के पेड़ लगाए। शेष 8 एकड़ जमीन में सब्जियों की खेती की शुरुआत की।
सब्जियों में ककड़ी, टमाटर, शिमला मिर्ची और लौकी आदि को प्राथमिकता दी।
मीडिया से बातचीत में अब् दुल रज् जाक कहते हैं कि वे सालाना एक करोड़ की कमाई कर रहे हैं।
सबसे बड़ी खरीददार तो भीलवाड़ा उपज मंडी अब्दुल रजाक कहते हैं कि जैविक तकनीक से पा रहे फल सब् जी को स् थानीय मार्केट में ही बेच रहे हैं।
सबसे बड़ी खरीददार तो भीलवाड़ा उपज मंडी है। खेती के दौरान गोबर की खाद वर्मी कंपोस्ट और अन्य कीटनाशक सभी में जैविक ही प्रयोग करते हैं।
ऐसा नहीं है कि भीलवाड़ा के प्रगतिशील किसानों की सूची में शामिल अब् दुल रज् जाक खुद ही नहीं बल्कि अन् किसानों को भी जैविक खेती के गुर सिखा रहे हैं।
इसके अलावा जैविक खेती के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए निशुल्क जानकारी भी देते हैं।
By Vishwanath Saini Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt