World Braille Day: कौन थे लुईस ब्रेल, खुद ब्लाइंड होकर भी नेत्रहीनों के लिए किया ब्रेल लिपि का अविष्कार
लुईस ब्रेल का जन्म सन 1809, को पेरिस के नजदीक कूपव्रे में हुआ था। जब वे बच्चे थे तब उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी।
लुई ब्रेल ने 6 डॉट्स आधारित एक कोड को डेवलप किया। इस कोड को बनाने के बाद धीरे- धीरे ये नेत्रहीन लोगों में फेमस होने लगी।
लेकिन ये दुर्भाग्य रहा कि ब्रेल इस प्रसिद्धि को नहीं देख सके कि उनका ये अविष्कार पूरी दुनिया में नेत्रहीन लोगों के लिए वरदान बन चुका है।
यूएनजीए द्वारा चुनी गई घटना की तारीख है।
1829 में, ब्रेल ने अपनी इस प्रणाली के बारें में एक पुस्तक प्रकाशित की, और ये जल्द ही पूरे यूरोप के नेत्रहीनों के लिए स्कूलों द्वारा अपनाया गया।
इसके बाद ब्रेल प्रणाली को संशोधित किया गया है। इसमें म्यूजिक, गणित को शामिल करने के लिए और विस्तार किया गया।
संगीत में नेत्रहीन संगीतकार इस्तेमाल करते हैं ब्रेल एल्फाबेट नेत्रहीन संगीतकारों को ब्रेल में संगीत पढ़ना सीखने से बहुत फायदा हुआ है।
ब्रेल संगीत छह- डॉट सेल का यूज करते हैं। इसमें अपने सिंटैक्स और अनुवाद भी शामिल होते हैं।
ब्रेल कोई भाषा नहीं है ब्रेल एक एल्फाबेट है जिसका यूज किसी भी भाषा में इस्तेमाल के लिए किया जाता है।
ये अरबी, चीनी, हिब्रू, स्पेनिश और हिंदी, फ्रेंच में भी उपलब्ध हैं।
गणित और विज्ञान के लिए नेमेथ कोड विशेष रूप से गणित और विज्ञान के लिए ब्रेल का एक विशेष संस्करण है, जिसे नेमेथ कोड कहते हैं।
ब्लाइंड बच्चों के लिए ब्रेल में खिलौनें यूनो, मोनोपॉली लेगो जैसे क्लासिक्स ब्रेल संस्करणों में उपलब्ध हैं।
By Asma Fatima Boldsky source: boldsky.com Dailyhunt