International Kite Day: लखनऊ के नवाबों के शौक से लेकर बिजली के अविष्कार तक, ये पतंगे देती हैं परवाज़ का सलीका
पतंगें को कई खा तरह से जीवन जीने की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जुनून, और अच्छी जिंदगी जीने के तरीके सीख सकते हैं।
ऐसा वी माना जाता है कि पतंग का आविष्कार चीन में हुआ था। सबसे पहले 28ं शताब्दी ई.पू. पहली पतंग बनी थी।
लखनऊ के नवाब और पतंगबाज़ी की लोकप्रियता इसके बाद बाद भारत में पतंग उड़ाने का शौक भारत का चुका था। 1700 के दशक में भारत में पतंगबाजी की शुरुआत हुई।
भारत में पतंगबाजी की लोकप्रियता सबसे ज्यादा लखनऊ में नवाबों के वक्त अपने चरम पर रही। नवाब वाजिद अली शाह पतंगबाजी के बेहद शौकीन थे।
लखनऊ पतंगबाज़ी में पतंगों के अजीबोगरीब नाम लखनऊ में एक पतंग इजाद हुई जिसका नाम ' तिक् कल' था।
लखनऊ में ही पतंगबाजी या कनकौवे बाजी, बड़ी पतंग यानि ' कमकउवा जैसे नाम से जानी जाती थी।
इन पतंगों का शौक जब लखनऊ के नवाबों को हुआ तब से पतंगों को नई दिशा ही मिल गई।
सन 1752 बेंजामिन फ्रैंकलिन ने पतंग की मदद से बिजली को बिजली साबित किया।
बेंजामिन फ्रैंकलिन ने एक तूफानी रात को बरसात में पतंग को उड़ाया, जब बिजली कड़क तबती तो उन्हें एक ऊर्जा महसूस हुई, उन्होंने धागे में एक चाभी बांध दी, देखा कि उस जगह पर चमक उठ रही है जिस स्थान पर चाभी बंधी है ।
'तुक्कल' नाम की पतंग अंतर्राष्ट्रीय पतंग दिवस की शुरुआत गुजरात के अहमदाबाद शहर में मनाया जाता है। इस त्योहार को उत्तरायण के रूप में जानते हैं।
दिन के दौरान, कलाबाज़ अपने पतंगों से प्रदर्शन करते हैं, जबकि रात में, ' तुक्कल' नाम की जगमगाती पतंगें आसमान में अटखेलियां खाती नजर आने लगती हैं।
By Asma Fatima Boldsky source: boldsky.com Dailyhunt