स्वीडन में मिला यूरोप को मालामाल करने वाला दुर्लभ खजाना, चीन की दादागीरी का अंत करीब
दुनिया के ताकतवर देशों में दुर्लभ खनिजों पर कब्जे के लिए रेस लगी हुई है।
खासतौर पर चीन इस रेस में दुनिया को पीछे छोड़ना चाहता है, ताकि भविष्य में उसे चैलेंज करने वाला कोई नहीं रहे।
यूरोपीय देश स्वीडन में दुर्लभ खनिज का सबसे बड़ा भंडार पाया गया है, जिसका इस्तेमाल फोन से लेकर मिसाइल तक में किया जाता है।
इस दुर्लभ खनिज के मिलने के बाद ना सिर्फ स्वीडन की अर्थव्यवस्था हमेशा के लिए बदल जाएगी, बल्कि यूरोप में दुर्लभ खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
खोज इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन टर्बाइनों की मांग में उछाल को देखते हुए इस खोज को हरित संक्रमण के लिए " निर्णायक" खोज के रूप में भी देखा जा रहा है।
यूरोपीय संघ में उपयोग की जाने वा उपयोगली दुर्लभ खनिज का लगभग 98% चीन से आयात किया गया था। यूरोपीय संघ में की खोज की गई है।
दुर्लभ खनिज पृथ्वी के अंदर पाए जाने वाले 17 तत्वों के समूह को संदर्भित करता है।
उपयोग कई वैज्ञानिक उत्पादों और बुनियादी ढांचों के निर्माण में किया जाता है।
दुर्लभ खनिज तत्वों में यूरोपियम, सेरियम, नियोडिमियम, प्रेसियोडीमियम, डिस्प्रोसियम जैसे खनिज तत्व होते हैं, जो काफी दुर्लभ और आधुनिक टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी हैं।
दुर्लभ खनिजों के बिना दुनिया में अंधेरा आज के जमाने में इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण में भी दुर्लभ खनिजों का इस्तेमाल किया जाता है।
जिस सेमी- कंडक्टर को भी दुर्लभ खनिज से ही बनाया जाता है।
यूरोपीय संघ के इंटरनल मार्केट कमिश्नन थिएरी ब्रेटन ने पिछले साल कहा था, कि " लिथियम और दुर्लभ खनिज पदार्थ जल्द ही तेल और गैस की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होगी।
स्वीडिश ऊर्जा मंत्री एब्बा बुस्च ने कहा, कि यूरोपीय संघ " इन सामग्रियों के लिए अन्य देशों पर बहुत अधिक निर्भर था।"
By Abhijat Shekhar Azad Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt