Jallikattu अब केवल पुरुषों तक ही सीमित नहीं, सामाजिक पूर्वाग्रहों को तोड़ रहीं Keethana बनीं मिसाल
Jallikattu तमिलनाडु में मजबूती और शारीरिक बल वाले खेल के रूप में लोकप्रिय हैं। सरकार की दलील है कि " जल्लीकट्टू" में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं होती है।
मदुरै में जल्लीकट्टू में भाग लेने वाले बैलों को ट्रांसवुमन कीर्तना कड़ी मेहनत से तैयार कर लोगों के सामने उदाहरण पेश कर रही हैं।
सांड और बैल के मालिकों और वश में करने वालों को क्रमशः 15, 16 और 17 जनवरी को मदुरै जिले में आयोजित होने वाले अवनियापुरम, पलामेडु और अलंगनल्लूर के जल्लीकट्टू कार्यक्रमों के लिए गहन प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।
2019 में तोड़ा सामाजिक पूर्वाग्रह जी कीर्तना, टी अक्षय, एन प्रियामणि, एस राजीव और एस अंजलि पिछले चार सालों से जल्लीकट्टू बैलों को पाल रही हैं।
दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कीर्तना ने बताया, ' मैं पशुपालकों के परिवार से हूं, मुझे बचपन से ही जल्लीकट्टू बैलों के लिए स्वाभाविक प्यार था।
लेकिन एक ट्रांसवुमन के रूप में मुझे काफी पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ा। ऐसे में पहला जल्लीकट्टू बैल 2019 में ही खरीदा गया।
ट्रांसजेंडर समूह ने 2019 के बाद सात और बैल खरीदे। दो बछड़े और 12 ग ( ज्यादातर पुलीकुलम नस्ल) भी खरीदीं।
कीथाना घर से 10 किमी दूर स्थित वरिचियुर में अपने मवेशियों को पालती हैं। मवेशियों के लिए इन्होंने तीन सेंट की जमीन पर विस्तृत इंतजाम किया है।
पुलिकुलम नस्लों का चुनाव किया है। मवेशियों के रखरखाव पर प्रति सप्ताह 3,500 रुपये खर्च होते हैं। ज्यादातर पैसे अपनी गायों का चुनाव है।
जल्लीकट्टू के बारे में आसान हैं कि जब बैठक में अपने बैल के नाम कीांव घोषणा की तो उनकी आंखों में आंसू गए।
जब ' चिन्ना मुथैया' ' वादी वासल दौड़े और मेरे एक बैल ने 2022 में चिन्ना कट्टलाई में आयोजित जल्लीकट्टू में मोटरसाइकिल जीती थी।
कीर्तना ने कहा कि उनके बैलों में नवीनतम जोड़ी डेढ़ साल की ' मयंडी' है। इसे एक बूचड़खाने में मारे जाने से बचाया गया और उनकी टीम ने खरीदा।
By Jyoti Bhaskar Oneindia source: oneindia.com Dailyhunt