फिश ऑयल सप्लीमेंट्स मुख्य रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड का भंडार होते हैं, जिनमें EPA (ईकोसापेंटेनोइक एसिड) और DHA (डोकोसाहेक्साएनोइक एसिड) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। हमारा शरीर इन फैटी एसिड्स को खुद नहीं बना पाता, इसलिए इन्हें बाहरी स्रोतों या सप्लीमेंट्स के जरिए लेना आवश्यक हो जाता है।
फिश ऑयल रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स (खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट) के स्तर को 15-30% तक कम करने में प्रभावी है। ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर हृदय रोगों का मुख्य कारण बनता है। इसके नियमित सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
मस्तिष्क का एक बड़ा हिस्सा फैट से बना होता है, जिसमें ओमेगा-3 की अहम भूमिका होती है। फिश ऑयल के सेवन से याददाश्त में सुधार होता है और एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है। यह बढ़ती उम्र में होने वाली मानसिक बीमारियों को रोकने में भी सहायक है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण फिश ऑयल जोड़ों की सूजन और अकड़न को कम करता है। यह रुमेटाइड अर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जिससे चलने-फिरने में आसानी होती है।
आंखों के बेहतर कामकाज के लिए DHA की बहुत जरूरत होती है। जो लोग घंटों कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं, उनके लिए फिश ऑयल रेटिना की सेहत बनाए रखने और आंखों के सूखेपन (Dry Eyes) को दूर करने में मददगार है।
ओमेगा-3 त्वचा की बाहरी परत को मजबूत बनाता है, जिससे त्वचा की नमी बरकरार रहती है और रूखापन दूर होता है। यह त्वचा को मुलायम बनाने के साथ-साथ असमय झुर्रियों को रोकने में भी मदद करता है।

