Jadoo ki Jhappi: बात तब की है जब मैं हाईस्कूल का बोर्ड का एग्जाम दे रही थी। मेरा आखिरी पेपर हिंदी का था। बाकी पेपर अच्छे हो गए थे। हिंदी में ही थोड़ा डर लग रहा था। लोक न फिर हिंदी पेपर भी बहुत अच्छा हो गया था जिससे मैं बेहद खुश थी और खुद को हल्का महसूस कर रही थी क्यों कि बोर्ड एग्जाम्स का बड़ा प्रेशर रहता था दिमाग पर।
लेकिन तीन चार दिन बाद ही पेपर लीक होने की खबर आई और सूचना मिली कि हिंदी के दोनों ही पेपर्स फिर से होंगे।
अब तो हम स्टूडेंट्स का बुरा हाल। मेरा तो जैसे आत्मविश्वास ही डगमगाने लगा। यहां ये बता दूँ ,कि मेरी गिनती बहुत अच्छे स्टूडेंट्स में होती थी। अतः अब डर लगना स्वाभाविक ही था क्योंकि एग्जाम दस दिन बाद ही होना था।
मुझको इतना परेशान देख मेरी मम्मी ने मुझे झप्पी दी और बस इतना ही कहा, "बेटा!! परेशानी किसी बात का हल नहीं है.. तुमने सालभर मेहनत की है,कोई चार दिन की पढ़ाई नहीं... तुम्हारा पेपर पहले से भी अच्छा होगा।"
और सच में, उस झप्पी ने जैसे जादू कर दिया (क्योंकि मेरी मम्मी झप्पी बप्पी बहुत रेयर ही देती थीं)। मेरा बिखरा आत्मविश्वास पलभर में सिमट गया और वाकई दोनों पेपर पहले से भी अच्छे हुए। अंततः मैंने स्कूल में टॉप किया।
ये था जादू की झप्पी का कमाल।
सुनीता तिवारी

