Grehlakshmi Hindi Kahani: तीन भाई और एक बहन में राधा सबसे छोटी थी। छोटी होने के कारण राधा को खूब प्यार मिलता था। विवाह के बाद राधा जिस घर में बिहा कर गई वहां भी छोटी थी। वहां भी उसे प्यार मिलने में किसी प्रकार कोई कमी नहीं हुई।
विवाह के दो वर्ष बाद उसने एक स्वस्थ कन्या को जन्म दिया। इस समय राधा शारीरिक रूप से कमजोर थी। उसने अपने ससुराल वालों की सहमति से अपनी मम्मी को बच्चे की देखरेख अपने पास बुलाई। बच्ची को प्यार से घर में चुनमुन नाम से पुकारने लगे। चुनमुन को अपने नानी से काफी लाड़ प्यार मिलने लगा। बच्ची के अपनेपन का बहुत ज्यादा अहसास होने के कारण नानी अपने साथ घर ले आई। बचपन से आगे बड़े होने के बाद भी नानी का सानिध्य चुनमुन को मिला।
माता-पिता किसी शौक की वस्तु मांगने पर मना कर देते तो नानी अवश्य पूरा कर देती थी। जो बात अपने मम्मी-पापा के पास नहीं कह पाती थी, उसे अपनी से बेहिचक कहती। देखते देखते बड़ी हो गई और वह अपने माता पिता के पास आकर रहने तो लगी। इसके बाद भी लगाव अधिक होने के कारण चुनमुन नानी से बात किए बिना नहीं रहती थी। गर्मी की छुट्टी नानी के घर में ही बिताती थी। इतना ही नहीं नाना के साथ मामा और मामी भी खूब प्यार करते थे चुनमुन को। पढ़ाई पूरी हो गई और शादी भी लग गई।
इस बीच वृद्धावस्था के कारण नानी चल बसी। चुनमुन की माता अपनी मम्मी के गुजर जाने के कारण सदमे से उबर नहीं पा रही थी। अक्सर बीमार रहने लगी। किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थी। चुनमुन चाहती थी कि वह मायके जाकर माता की देखभाल करे, पर यह बात किसी सपने से कम नहीं था। ससुराल में रहकर यह कर पाना भी असंभव सा था। एक दिन ऐसा आया कि चुनमुन की मम्मी बीमारी से उबर नहीं पाई और चल बसी। इधर चुनमुन ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। चुनमुन ने अपने बच्चे के लिए बहुत सारे सपने संजोये थे। चुनमुन जानती थी एक बच्चे को अच्छा संस्कार, माया और दुलार देने में नानी की बहुत बड़ी भूमिका होती है।
चुनमुन इस बात का हमेशा चुभन रहा कि मेरी बेटी नानी के वंचित हो गई। बेटी हो या बेटा हर किसी के जीवन में जिन्होंने नानी का सानिध्य पाया है वह नानी के घर को कभी भुला नहीं सकते। नानी का घर पोती पोतो के लिए संस्कार के मंदिर जैसा होता है, जिसे चुनमुन ने नजदीक से अनुभव किया था। चुनमुन को अपने बच्चे के लिए नानी के घर के इस संस्कारी मंदिर का अभाव सदा के लिए कुछ कमी सा महसूस करने का आभास हमेशा कराता रहा।

