जादू की झप्पी मतलब प्यार से गले लगाना, आलिंगन या बाहोँ मे भरना। 2003 में आई पिक्चर "मुन्नाभाई एम.बी.बी.एस" से यह इतना प्रचलित हुआ कि यह गले लगाने आदि का पर्यायवाची बन गया।
सच कहें तो हमें इससे प्यार हो गया। मेरी ज़िन्दगी में इस "जादू की झप्पी" का बहुत बड़ा योगदान है। मैं अपने बचपन से बड़े होने तक की बात बताना चाहती हूं। जब मेरे अम्मा-बाबूजी मुझे मेरी त्रुटियों पर डांटने फटकारने की जगह "जादू की झप्पी" के साथ समझाने की कोशिश करते थे और उसमें वे कामयाब भी होते थे।
एक बार मैंने बाबूजी से कहा कि आप हम भाई-बहनों से प्यार ही नहीं करते क्योंकि आपके दफ़्तर में आपसे छोटे पदों पर काम करने वाले अंकल के बच्चों के पास ढेरों सुंदर कपड़े हैं पर हमारे 2-3 ही अच्छे कपड़े हैं जिन्हे हम बाहर पहन सकते हैं। मेरे बाबूजी ने मुस्कुरा कर एक प्यारी सी झप्पी दी और पास बैठाया और मुझसे पूछा कि,"क्या आप चोरी, बेईमानी और गलत काम को अच्छा समझती हैं? मुझे लोग चोर, बेईमान कहें तो आपको अच्छा लगेगा"? मैंने न में सिर हिला दिया।
"तब बाबूजी ने मुझे रिश्वत और बेईमानी का मतलब समझाया और कहा, "यदि आप लोगों को उन बच्चों की तरह सब कुछ चाहिये तो मुझे गलत काम करने होंगें पर मैं जानता हूँ कि मेरे बच्चे ऐसा कभी नहीं चाहेंगें"। मैं कभी किसी कारण से परेशान होती थी तो भी वे जादू की झप्पी से ही बड़े ही प्यार से मुुझे उस परेशानी से निकलने में मदद करते थे। मेरे विचार से "जादू की झप्पी" हर एक को बेहतर इन्सान बना सकती है। यह आपसी दुश्मनी को समाप्त करने में एक अहम योगदान दे सकती है।आज हम सभी को इसकी बहुत जरूरत है।

