Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्री 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है और इसका समापन 27 मार्च को नामनवमी के साथ होगा। इस दौरान, यदि आपके घर में भी अखंड ज्योति जल रही है तो इन नियमों का पालन करना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
आइये आपको वे ज़रूरी नियम..
यदि आपके घर में भी अखंड ज्योति जल रही है तो इसका मतलब है कि अपने माँ दुर्गा की उपस्थिति और उनकी कृपा को निरंतर बनाये रखने के लिए संकल्प लिया है, जो कि माँ दुर्गा की मौजूदगी और भक्त की अटूट भक्ति का प्रतीक है। यह अखंड ज्योति, कलश स्थापना (घटस्थापना) के दिन प्रज्वलित की जाती है जो (रात-दिन) लगातार पूरे 9 दिनों तक बिना बुझे जलती रहनी चाहिए। माना जाता है कि अखंड ज्योति जलाने से सभी रोग व कष्ट दूर होते हैं साथ ही देवी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
लेकिन अखंड ज्योति सिर्फ जलाना काफी नहीं, बल्कि इसके साथ कई नियम ऐसे भी हैं जिनका पालन न करने से पूजा अधूरी मानी जाती है, जिससे आर्थिक बाधाएं, घर में अशांति और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव पड़ सकता है। तो आइये जानते हैं जरूरी नियम..
Akhand Jyoti ke Niyam: अखंड ज्योति जलाने के ज़रूरी नियम..
ज्योति को 9 दिनों तक बिना बुझे जलाए रखें
अखंड का अर्थ ही है “अटूट“। यह भक्त की अटूट भक्ति, अंधकार पर प्रकाश की विजय साथ ही माँ की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक है, इसलिए यह अखंड ज्योति (दिन-रात) लगातार पूरे 9 दिनों तक, बिना बुझे जलती रहनी चाहिए।
जलाने से पहले संकल्प लें और मंत्र पढ़ें
अखंड ज्योति जलाने से पहले संकल्प लें और “ॐ ज्योतिर्मयि देव्यै नमः”, “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मन्त्रों का जाप करें। शास्त्रों के अनुसार, संकल्प से भक्ति मजबूत होती है माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
घर पूरी तरह खाली छोड़कर बाहर न जाएं (किसी को घर में रहने दें)
अखंड ज्योति माँ दुर्गा का स्वरुप है इसलिए ज्योति को अकेली छोड़कर या घर बंद करके जाना माता का अपमान माना जाता है। इस दौरान, घर को पूरी तरह से खाली न छोड़े, किसी को भी घर में मौजूद ज़रूर रखें, वरना ज्योति बुझने का खतरा बढ़ जाता है जिससे माँ नाराज़ हो सकती हैं और घर में क्लेश और अनिष्ट संकेत मिल सकते हैं।
दीपक को कभी भी ज़मीन पर सीधे न रखें बल्कि ऊँचे स्थान पर रखें!
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, दीपक को ज़मीन पर रखना अपवित्र माना जाता है इसलिए अखंड ज्योति के दीपक को सदैव ऊँचे स्थान पर रखें।
बाती लम्बी एवं सही रखें!
दीपक में अखंड ज्योति की बाती लम्बी एवं सही रखें। यदि बीच में बाती बदलने की आवश्यकता हो तो उसे अखंड ज्योति से ही जलाएं। ज्योति का फूंक मारकर या हवा से बुझना अशुभ माना जाता है।
अखंड ज्योति को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या अग्नि कोण में रखें
ईशान यानी (उत्तर-पूर्वीय) दिशा देवताओं की दिशा है, जहां मां की कृपा सबसे ज्यादा आती है, इसलिए ज्योति को ईशान कोण में रखने से पूजा का पूरा लाभ मिलता है।
ज्योति को कभी अकेला न छोड़ें
समय-समय पर घी/तेल डालते रहें, क्योंकि निरंतर देखभाल से ही ज्योति अखंड रहती है।
Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।
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