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कॉफी की कीमतों में भारी गिरावट, 80 रुपये तक टूटे दाम. किसानों ने सरकार से मदद की मांग

कॉफी की कीमतों में भारी गिरावट, 80 रुपये तक टूटे दाम. किसानों ने सरकार से मदद की मांग

Kisan India 2 months ago

Coffee farmers crisis: देश में जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय हालात का असर बड़े उद्योगों पर दिख रहा है, वहीं अब इसका सीधा असर किसानों तक पहुंच चुका है. खासकर कॉफी उगाने वाले किसान इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहे हैं.

बाजार में कॉफी के दाम तेजी से गिर गए हैं और हालत यह है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए खरीदार तक नहीं मिल रहे.

कीमतों में बड़ी गिरावट से बढ़ी चिंता

द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, कॉफी किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी कीमतों में आई भारी गिरावट है. पिछले साल यानी मार्च-अप्रैल 2025 में रोबस्टा चेरी कॉफी की कीमत 260 से 280 रुपये प्रति किलो के बीच थी, लेकिन अब यह घटकर 180 से 205 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. यानी किसानों को सीधे 60-80 रुपये प्रति किलो तक का नुकसान हो रहा है.

इसी तरह अरेबिका कॉफीकी बात करें तो इसकी कीमत भी कम हो गई है. जो अरेबिका चेरी कॉफी पिछले साल करीब 300 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब मार्च 2026 में घटकर करीब 260 रुपये प्रति किलो रह गई है. यह गिरावट किसानों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा.

वैश्विक तनाव ने बिगाड़ी सप्लाई चेन

इस पूरी समस्या की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव है, खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष. इसके कारण कॉफी की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है.

कॉफी किसानों का कहना है कि पहले जहां आसानी से निर्यात हो जाता था, अब वहां बड़ी दिक्कत आ रही है. जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कई कंटेनर रास्ते में ही फंस गए हैं. जानकारी के मुताबिक करीब 300 कंटेनर भारतीय कॉफीके ऐसे हैं जो पश्चिम एशिया जाने वाले थे, लेकिन या तो बंदरगाहों पर अटके हुए हैं या बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं. इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है.

बढ़ा खर्च, घटा व्यापार

जहां एक तरफ कीमतें गिर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ निर्यात का खर्च बढ़ गया है. जहाजों का बीमा महंगा हो गया है, कंटेनर डिलीवरी की लागत बढ़ गई है और लंबा रास्ता तय करने के कारण माल ढुलाई का खर्च भी ज्यादा हो गया है.

कुछ यूरोपीय खरीदार अब लंबा रास्ता अपनाने लगे हैं, जैसे केप ऑफ गुड होप के जरिए शिपमेंट करना. इससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं. नतीजा यह हुआ है कि खरीदारों ने किसानों से खरीद कम कर दी है.

छोटे किसानों पर सबसे ज्यादा असर

भारत में ज्यादातर कॉफी किसान छोटे और सीमांत हैं. ऐसे में जब कीमतें गिरती हैं और खरीदार नहीं मिलते, तो इन किसानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है. उनकी आय सीधे घट जाती है और खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है. कॉफी उत्पादक क्षेत्रोंमें यह संकट साफ दिखाई दे रहा है, जहां किसान अपनी फसल बेचने के लिए परेशान हैं.

आदिवासी इलाकों में और भी मुश्किल हालात

आंध्र प्रदेश के अराकू जैसे इलाकों में स्थिति और गंभीर है. यहां आदिवासी किसान कॉफी की खेती करते हैं, लेकिन अब सरकारी एजेंसियों ने भी खरीद बंद कर दी है. इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा.

सरकार से मदद की मांग

कॉफी किसानों के संगठन ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसा एक निश्चित दाम मिलना चाहिए. उन्होंने मांग की है कि रोबस्टा कॉफी के लिए कम से कम 250 रुपये प्रति किलो और अरेबिका के लिए 300 रुपये प्रति किलो की गारंटी दी जाए. साथ ही सरकार और कॉफी बोर्ड को बाजार में हस्तक्षेप करके खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए.

अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कॉफी किसानों की स्थिति और खराब हो सकती है. निर्यात में दिक्कत, बढ़ती लागत और गिरती कीमतें मिलकर इस क्षेत्र को कमजोर कर सकती हैं.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Kisan India