Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
सुपारी के दाम आसमान पर: पहली बार 500 रुपये किलो पहुंची कीमत, खरीदार और किसान दोनों हैरान

सुपारी के दाम आसमान पर: पहली बार 500 रुपये किलो पहुंची कीमत, खरीदार और किसान दोनों हैरान

Kisan India 2 months ago

Areca nut price: इस बार सुपारी (अरेका नट) के बाजार से किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई है. लंबे समय से परेशान चल रहे किसानों को अब कीमतों में उछाल के रूप में राहत मिली है. पहली बार ताजी सुपारी का दाम 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.

यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.

त्योहारों के मौसम से पहले आई इस तेजी ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान जरूर लाई है, लेकिन इसके पीछे कई ऐसी वजहें भी हैं जो चिंता बढ़ाने वाली हैं.

बीमारियों ने किया था फसल को कमजोर

ऑन मनोरमा की खबर के अनुसार, पिछले कुछ समय से सुपारी की फसल कई तरह की बीमारियोंसे जूझ रही थी. खासकर लीफ स्पॉट और फ्रूट रॉट जैसी फंगल बीमारियों ने उत्पादन को काफी प्रभावित किया. कई किसानों की फसल ठीक से तैयार ही नहीं हो पाई, जिससे उनकी आय पर असर पड़ा. यही वजह है कि इस साल बाजार में सुपारी की सप्लाई पहले के मुकाबले कम है.

कैसे बढ़ते-बढ़ते 500 रुपये तक पहुंचे दाम

मार्च महीने की शुरुआत में ताजी सुपारी का भाव करीब 490 रुपये प्रति किलो था. बीच में दाम करीब 30 रुपये तक गिर भी गए थे, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी. लेकिन धीरे-धीरे बाजार में मांग बढ़ी और सप्लाई कम होने की वजह से कीमतें फिर ऊपर चढ़ने लगीं. अब यह सीधे 500 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.

सूखी सुपारी और दूसरी किस्मों में भी तेजी

सिर्फ ताजी सुपारी ही नहीं, बल्कि सूखी सुपारी के दाम भी बढ़े हैं. सूखी सुपारी की कीमत 545 रुपये से बढ़कर 555 रुपये प्रति किलो हो गई है. वहीं दूसरी किस्मों में भी तेजी देखी जा रही है. पत्तोरे सुपारी 410 रुपये, कोक्का पत्तोरे 345 रुपये और करिक्कोट सुपारी 265 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. कुछ महीनों पहले करिक्कोट सुपारी मात्र 110 रुपये किलो बिक रही थी, ऐसे में अब इसकी कीमत में बड़ा उछाल देखने को मिला है.

कीमत बढ़ने की बड़ी वजह क्या है

कीमतों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह है उत्पादन में कमी. इस साल सुपारी की पैदावार 30 से 40 प्रतिशत तक कम बताई जा रही है. इसके अलावा चुनाव से पहले सीमा पर सख्ती बढ़ने के कारण बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाली अवैध सुपारी पर भी रोक लगी है. इससे बाजार में सप्लाई और कम हो गई, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा.

सहकारी संस्था के फैसले से मिला सहारा

मंगलुरु स्थित सुपारी किसानों की सहकारी संस्था CAMPCOने भी खरीद दरों में बढ़ोतरी की है. इससे बाजार में कीमतों को मजबूती मिली है और किसानों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं. यह कदम किसानों के लिए राहत भरा साबित हुआ है, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य मिल पा रहा है.

किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों

हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन कम उत्पादन के कारण वे पूरी तरह इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं. कई किसानों के पास बेचने के लिए पर्याप्त मात्रा में सुपारी ही नहीं है, जिससे उनकी कमाई सीमित रह गई है.

क्या आगे भी बने रहेंगे ऊंचे दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद इसमें कुछ गिरावट आ सकती है. साथ ही सुपारी की कीमत उसकी गुणवत्ता और आकार पर भी निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग इलाकों में दाम अलग हो सकते हैं.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Kisan India