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'पुतिन की उतारी आरती लेकिन रूस.', विदेश नीति पर संजय राऊत ने मोदी सरकार को घेरा

'पुतिन की उतारी आरती लेकिन रूस.', विदेश नीति पर संजय राऊत ने मोदी सरकार को घेरा

Sanjay Raut Attack On Modi government Foreign policy: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राऊत ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे (Vladimir Putin India visit) के बहाने मोदी सरकार पर हमला किया है।

उन्होंने पुतिन के हालिया भारत दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक परंपराओं और विदेश नीति पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिवसेना सांसद ने कहा कि मोदी सरकार ने पुतिन की उतारी आरती लेकिन रूस चीन के करीब है। ये मोदी सरकार की विदेश नीति का फेल्योर है।

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संजय राऊत ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा कि 4 दिसंबर को पुतिन के दिल्ली आगमन के दौरान पूरी राजधानी की सड़कें बंद कर दी गईं। पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आवाजाही की वजह दिल्ली में जाम आम बात है, ऐसे में पुतिन के दौरे ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

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राऊत ने तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आरती उतारी थी और अब पुतिन की आरती उतारते नजर आए। उन्होंने इसे मजेदार लेकिन चिंताजनक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति देश के सम्मान से ज्यादा नेताओं की छवि चमकाने पर केंद्रित है। सामना में यह भी लिखा गया कि पुतिन के स्वागत के लिए राष्ट्रपति भवन में तंबूवालों से कालीन किराए पर लेने पड़े। राऊत ने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति भवन में इतने बड़े विदेशी मेहमान के स्वागत के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। उन्होंने इसे देश की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।

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राऊत ने कहा कि रूस कभी भारत का सबसे भरोसेमंद दोस्त रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में रूस ज्यादा चीन के करीब नजर आता है। उन्होंने यह भी लिखा कि अमेरिका और रूस दोनों ही भारत को अपना सामान बेचने में रुचि रखते हैं। कोई हथियार, तो कोई तेल. उनका आरोप है कि कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण भारत का शोषण हो रहा है।

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विपक्ष को नजरअंदाज करने का आरोप

संजय राऊत ने सबसे बड़ा सवाल लोकतंत्र को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि पुतिन के सम्मान में आयोजित भोज में विपक्षी नेताओं को नहीं बुलाया गया। राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि पहले विदेशी मेहमान विपक्षी नेताओं से भी मिलते थे, लेकिन मोदी सरकार में यह परंपरा खत्म कर दी गई। राऊत ने रूस और भारत की तुलना करते हुए कहा कि रूस में विपक्ष लगभग खत्म हो चुका है और भारत भी उसी राह पर बढ़ता दिख रहा है।

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