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भारत-चीन के बीच 16 घंटे चली सैन्य वार्ता

भारत-चीन के बीच 16 घंटे चली सैन्य वार्ता

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच 9वें दौर की सैन्य वार्ता भारतीय क्षेत्र मोल्डो में 16 घंटे तक चली है। दोनों देशों के बीच करीब ढाई माह बाद हुई इस बैठक में भारत ने एकबार फिर चीन से स्पष्ट कहा है कि सीमा पर तनाव कम करने की जिम्मेदारी चीन की है, इसलिए उसे पूरी तरह हटना पड़ेगा। इससे पहले चीन के साथ 8वें दौर की सैन्य वार्ता 06 नवम्बर को हुई थी।

वैसे तो लद्दाख के अग्रिम क्षेत्रों में बर्फीली ठंड शुरू होने के बावजूद दोनों देशों के हजारों सैनिक एलएसी पर तैनात हैं लेकिन करीब ढाई माह बाद चीन वार्ता की टेबल पर आने को राजी हुआ। चीन के साथ 9वें दौर की सैन्य वार्ता रविवार को सुबह 10.30 बजे पूर्वी लद्दाख के चुशूल सेक्टर में भारतीय क्षेत्र मोल्डो में शुरू हुई। यह बैठक आज सुबह लगभग 2.30 बजे समाप्त हुई। यह बैठक लगभग 16 घंटे तक चली।

भारत-चीन का साझा बयान अभी जारी नहीं हुआ है जिसका इंतजार है। बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया है। इसमें विदेश मंत्रालय के भी प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।

दोनों देशों ने 06 नवम्बर को हुई 8वें दौर की कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता में एक दूसरे को टॉप सीक्रेट 'रोडमैप' दिए थे, जिस पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन किया है। आठवें दौर की सैन्य वार्ता में इसी पर फोकस किया गया लेकिन एलएसी पर तनाव कम करने या पीछे हटने को लेकर दोनों देशों के बीच किसी ठोस रोडमैप पर सहमति नहीं बन पाई थी। हालांकि छठे और सातवें दौर की बातचीत के बाद एलएसी पर यथास्थिति और सैन्य जमावड़ा नहीं बढ़ने को सकारात्मक माना जा रहा था। इसलिए इस वार्ता में गतिरोध कम होने की काफी उम्मीदें लगाई जा रही थीं। इसके बावजूद करीब 10 घंटे तक चली 8वें दौर की सैन्य वार्ता में दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ नहीं पिघली।

पिछली बैठक में भी भारत ने साफ कर दिया था कि डिसइंगेजमेंट होगा तो पूरी एलएसी पर होगा। ऐसी स्थिति में चीनी सेना को पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर 4-8 के पीछे जाना पड़ता लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नहीं हुई थी। बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को वार्ता में तय हुए पांच बिन्दुओं के आधार पर एक दूसरे से 'रोडमैप' मांगा गया। 12 अक्टूबर को हुई सातवें दौर की सैन्य वार्ता 'फिर मिलेंगे' के वादे के साथ खत्म हुई थी। इसी बैठक में चीन और भारत ने एक दूसरे को टॉप सीक्रेट 'रोडमैप' सौंपे थे जिस पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मंथन करने के बाद आठवें दौर की सैन्य वार्ता में फोकस किया गया। इसके बावजूद किसी भी मुद्दे पर ठोस सहमति नहीं बन पाई।

अभीतक हुईं इस बातचीत में दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए एलएसी से पीछे हटने पर सहमति जताई है लेकिन यह कैसा होगा, इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। दरअसल सीमा से पीछे हटने की शर्तों को लेकर दोनों कमांडर अड़े हुए हैं। मैराथन बातचीत में किसी ठोस रोडमैप पर सहमति न बन पाने के बाद अब माना जा रहा है कि 9वें दौर की सैन्य वार्ता में इस जमी बर्फ को पिघलाने के लिए कूटनीतिक और विशेष प्रतिनिधि स्तर पर नए सिरे से वार्ता हुई होगी। भारत-चीन का साझा बयान अभी जारी नहीं हुआ है जिसका इंतजार है।

दोनों देशों के बीच करीब ढाई माह बाद हुई इस बैठक में भारत ने एक बार फिर चीन से स्पष्ट कहा है कि सीमा पर तनाव कम करने की जिम्मेदारी चीन की है, इसलिए उसे पूरी तरह हटना पड़ेगा। इस बातचीत के बारे में जानकारी रखने वाले सेना के अधिकारियों के मुताबिक भारत ने फिर एक बार इस बात पर जोर दिया है कि टकराव वाले क्षेत्रों में डिसइंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चीन के ऊपर है।

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