चंदौली/प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब चंदौली में तैनात दो पीसीएस (SDM) अधिकारियों का आपसी विवाद थाने तक पहुँच गया। सदर तहसील में तैनात एसडीएम दिव्या ओझा के पिता ने अपने दामाद, पीडीडीयू नगर के एसडीएम अनुपम मिश्रा के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोपों की फेहरिस्त में नपुंसकता छिपाकर शादी करने से लेकर 20 करोड़ रुपये की दहेज मांग और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने जैसे सनसनीखेज दावे किए गए हैं।
2017 और 2019 बैच के अधिकारियों का रिश्ता
जानकारी के अनुसार, पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा की भतीजी दिव्या ओझा (2017 बैच) की शादी दिसंबर 2020 में अनुपम मिश्रा (2019 बैच) के साथ हुई थी। दिव्या के पिता निशाकांत ओझा ने प्रतापगढ़ के महिला थाने में तहरीर देते हुए बताया कि शादी के समय से ही ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना शुरू कर दी गई थी।
ससुर के गंभीर आरोप: "जन्मजात नपुंसक है दामाद"
दिव्या के पिता ने अपनी शिकायत में चौंकाने वाला दावा किया है कि अनुपम मिश्रा जन्मजात नपुंसक हैं और यह तथ्य छिपाकर धोखाधड़ी से शादी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बेटी इस विषय पर सवाल उठाती थी, तो पति और सास मिलकर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट करते थे। आरोप है कि 7 दिसंबर 2025 की रात दिव्या पर जानलेवा हमला भी किया गया, जिसके साक्ष्य के रूप में मेडिकल रिपोर्ट और ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपी गई है।
दहेज में 20 करोड़ की मांग और ब्लैकमेलिंग
तहरीर के मुताबिक, आरोपी पक्ष ने शुरुआत में 20 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 1 करोड़ नकद और महंगी गाड़ी तक लाया गया। पिता का दावा है कि उन्होंने अब तक करीब 85 लाख रुपये से अधिक का सामान और नकद दिया है। यही नहीं, आरोप है कि मारपीट के दौरान दिव्या के अश्लील वीडियो और फोटो बनाए गए, जिन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे लगातार ब्लैकमेल किया जा रहा है।
प्रशासनिक हलचल और पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतापगढ़ पुलिस ने दहेज उत्पीड़न, जान से मारने की कोशिश और अन्य सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। महिला थाना प्रभारी मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इधर, चंदौली में दोनों अधिकारियों के सरकारी (CUG) नंबर बंद आ रहे हैं। चर्चा है कि अनुपम मिश्रा की मां भी अलीनगर थाने पहुंची थीं, लेकिन बिना मुकदमा दर्ज कराए लौट गईं।
पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा ने इसे परिवार का निजी मामला बताते हुए सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार किया है। दो जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों के बीच इस तरह के आरोपों ने प्रशासनिक अमले में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

