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मेरठ मेडिकल कॉलेज: नेत्र रोग विभाग में 'एडवांस फेको मशीन' स्थापित; अब बिना टांके और बिना दर्द के होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन

मेरठ मेडिकल कॉलेज: नेत्र रोग विभाग में 'एडवांस फेको मशीन' स्थापित; अब बिना टांके और बिना दर्द के होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन

मेरठ। लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज, मेरठ के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता के कुशल नेतृत्व में संस्थान नित नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी कड़ी में कॉलेज के उच्चीकृत नेत्र रोग विभाग के बेड़े में अब 'एडवांस फेको मशीन' (Phacoemulsification Machine) भी शामिल हो गई है।

इस अत्याधुनिक मशीन की स्थापना से पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों को मोतियाबिंद के इलाज के लिए निजी अस्पतालों के महंगे खर्च से राहत मिलेगी।

क्रांतिकारी तकनीक: क्या है फेको सर्जरी? उच्चीकृत नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि 'फेकोइमल्सीफिकेशन' मोतियाबिंद के इलाज की एक वैश्विक और क्रांतिकारी प्रक्रिया है। इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों के जरिए धुंधले हो चुके प्राकृतिक लेंस को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकाल लिया जाता है और उसकी जगह एक फोल्डेबल (मुड़ने वाला) आर्टिफिशियल लेंस लगा दिया जाता है।

मरीजों को मिलने वाले मुख्य लाभ:

  • दर्द-रहित और टांका-रहित: यह पूरी तरह 'नो-स्टिच' (बिना टांके वाली) सर्जरी है।

  • कम समय: ऑपरेशन में मात्र 10 से 15 मिनट का समय लगता है।

  • त्वरित रिकवरी: मरीज उसी दिन घर जा सकता है और बहुत जल्द सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।

  • सटीकता: आधुनिक तकनीक के कारण जटिलताओं की संभावना न के बराबर रहती है।

प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता की सलाह: सफल सर्जरी के बाद सावधानी पर जोर देते हुए प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने कहा कि मरीजों को ऑपरेशन के बाद डॉक्टर द्वारा दी गई आई ड्रॉप्स का ही समय पर इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि मरीज अपनी आंख को मलने या दबाने से बचें और उसे धूल-मिट्टी व पानी के संपर्क से सुरक्षित रखें।

मेडिकल कॉलेज की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर संस्थान के सभी संकाय सदस्यों ने नेत्र रोग विभाग की टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस मशीन के आने से अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं सरकारी दर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

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