बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। भारतीय नदी परिषद के तत्वावधान में हिंडन नदी के पुनरुद्धार और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए निकाली जा रही 'हिंडन शोध यात्रा' मंगलवार को बुढ़ाना क्षेत्र के ग्राम उकावली और नगवा पहुंची।
यात्रा के माध्यम से नदी के किनारे बसे ग्रामीणों को हिंडन की गिरती सेहत और बढ़ते प्रदूषण के प्रति सचेत किया गया।
भारतीय नदी परिषद के संस्थापक और प्रसिद्ध नदी विशेषज्ञ रमन कांत त्यागी ने हिंडन शोध यात्रा का नेतृत्व करते हुए ग्रामीणों के साथ संवाद करते हुए नदी के स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान दुर्दशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि दशकों पहले हिंडन का पानी मोती जैसा चमकदार और निर्मल हुआ करता था। लेकिन आज, फैक्ट्रियों से निकलने वाले घातक केमिकल और शहरों-कस्बों का बिना उपचारित सीवेज इस नदी को ज़हरीला बना रहा है। काला और बदबूदार होता पानी हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
पौधारोपण और संरक्षण की अपील
शोध दल ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हिंडन के अस्तित्व को बचाने के लिए नदी के किनारों पर सघन पौधारोपण करें। पौधों की जड़ें न केवल मिट्टी के कटान को रोकेंगी, बल्कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती प्रदान करेंगी। ग्रामीणों को जागरूक किया गया कि वे कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक नदी में न फेंकें।
बागपत के लिए रवाना हुई यात्रा
हिंडन नदी के उद्गम स्थल (सहारनपुर की शिवालिक पहाड़ियों) से शुरू हुई यह शोध यात्रा बुढ़ाना में अपना पड़ाव पूरा करने के बाद जनपद बागपत की ओर रवाना हो गई। यात्रा का उद्देश्य हिंडन के पूरे प्रवाह मार्ग का डेटा एकत्र करना और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर सरकार के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करना है।

