नोएडा। जनपद गौतमबुद्ध नगर के थाना साइबर क्राइम में एक महिला ने नौ लोगों के खिलाफ डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने बिना अनुमति उनके डिजिटल वॉलेट का पिन और पासवर्ड हासिल कर करोड़ों रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी का फर्जी ट्रांसफर किया।
पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि विवेक विहार, दिल्ली निवासी प्रतीक गौरी पुत्री तरुण गौरी की शिकायत पर राहुल रौतेला, युवराज रघुवंशी, हिमांशु शर्मा, उत्कर्ष द्विवेदी, अमन द्विवेदी, करण आहुल वालिया, प्रतीक द्विवेदी, अविरल अग्रवाल और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पीड़िता के अनुसार वर्ष 2021 में उनकी मुलाकात प्रतीक द्विवेदी से हुई थी। दोनों ने मिलकर एक ब्लॉकचेन एंटरप्राइज शुरू किया, जिसमें दोनों को कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया। पीड़िता को कंपनी का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया गया था, जबकि प्रतीक द्विवेदी प्रोडक्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे।
महिला का दावा है कि कंपनी ने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच फ्यूचर टोकन के लिए एग्रीमेंट कर करीब 21 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी और 11 महीने के भीतर यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया था। निवेशकों का फंड कॉरपोरेट डिजिटल वॉलेट में जमा किया जाता था, जिसके एक्सेस क्रेडेंशियल शुरुआती दौर में शिकायतकर्ता और प्रतीक द्विवेदी दोनों के पास थे।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि प्रतीक द्विवेदी ने धोखाधड़ी कर कंपनी के क्रिप्टो अकाउंट से करोड़ों रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी अपने परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दी।
शिकायत के मुताबिक बाद में दोनों के बीच विवाद होने पर इसे सुलझाने के लिए दुबई में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान सभी से मोबाइल फोन बाहर रखने को कहा गया। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने उनके फोन से महत्वपूर्ण जानकारी और डेटा हासिल कर अनधिकृत खातों में करोड़ों रुपये की क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर कर दी।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

