Hindi Short Story: नानी का घर गर्मी की छुट्टियां होने भर की देर थी बस फिर क्या था जैसे ही स्कूल के आखिरी दिन की छुट्टियों की घंटी बजी मैं बसता उठा कर सीधा भागा अपने घर ..!! दर असल तीन चार महीने से मेरे मामा जी की शादी की बात चल रही थी मगर हमारी छुट्टियां ना होने की वजह से शादी की तारीखें तय नहीं की गई थी।
मगर जैसे ही हमारे स्कूल की छुट्टियों का एनाउंसमेंट हुआ सबसे पहले मां ने नानी को फोन करके बताया और शादी की तारीख भी पक्की कर दी गई।
जिस दिन स्कूल का आखिरी दिन था संयोग से हमें उसी दिन का टिकट मिल गया था। घर में सब तैयारियां हो चुकी थी बस मेरे आने की देर थी। जैसे ही मैं घर आया मां ने फटाफट से मेरे कपड़े बदले और खाना खिलाया फिर हम निकल पड़े स्टेशन की तरफ स्टेशन पहुंच कर अपने अपने सीट पे हम सभी बैठ गये और इंतजार करने लगे अपनी मंजिल पर उतरने का। जब हमलोग नानी के घर पहुंचे तो वहां पहले से ही और भी लोग उपस्थित थे हमें देखते ही नाना जी दौड़ कर हमारे पास आ गये और कहने लगे क्यों हीरो खेल चालू है कि नहीं ..? मैंने भी मुस्कुरा कर कहा नाना जी क्या कहते हो आप एक मैच हो जाए ...?
चलो फिर बस फिर क्या था एक साइड टीम में नाना जी, छोटे नानी जी मामा मौसी मौसा जी और दूसरी टीम में मैं मेरी दीदी और मेरे पापा और भी दो चार लोग थे देखते ही देखते हमलोगों के बीच मैच शुरु हो गया। नाना जी का दलान बहुत बड़ा है हम लोग फुटबाल प्रेमी हैं। जब भी जी करता दलान को ही मैदान समझ कर खेलना शुरु कर देते थे। उस दिन जो हमलोग मैच खेले वहां नानी के यहां देखने वालों की भीड़ इकट्ठी हो गयी। और दलान पर बैठे लोगों ने भी तालिया बजा बजा कर हमारा मनोबल खूब बढाया।
वहां उपस्थित लोगों की भीड़ सब कह रहे थे आज से पहले ससुर दामाद और नाती तीनों को एक साथ कभी खेलते हुए नहीं देखा था। राह से गुजरने वाले लोगों की आंखें यूं ही हम पे आकर ठहर जाती थी और मुहल्ले वाले तो जल भून कर राख हो रहे थे। उनका चेहरा उस वक्त देखने लायक था।
गर्मी का दिन था तो था ही जैसे ही हम लोग खेल खत्म कर के बैठे की नानी ठंडा ठंडा आमरस की प्याली बना कर हमारे लिए ले आई । उस आमरस का स्वाद आज तक जिव्हा में नहीं भूली है हमारी सच..!! कितना खूबसूरत वो पल था। नानी के घर की इससे खूबसूरत यादें और कोई हो ही नहीं सकती है। आज भी जब हम इकट्ठे होते हैं तो उस मैच की चर्चा बड़े ही गर्मजोशी के साथ करते हैं।
- किरण काजल

